एहसान तले जिंदगी ehshan tale jindagi


एहसान तले जिंदगी एक रोमांटिक कहानी है जिसके पात्र काल्पनिक है ,बात उन दिनों की है जब मै अपनी  स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली थी परन्तु आगे कि पढ़ाई के लिए मेरे माता पिता के पास इतने
पैसे नहीं थे कि मेरी पढ़ाई को आगे बढ़ाया जा सके  इन सब परिस्थितियों को देखते हुवे  अब मै कुछ काम करने का मन बनाने लगा क्यो की परिवार पर ज्यादा बोझ बनना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।


       एक दिन मै कुछ पैसों का  इंतजाम करके मामी के पास बैठ गया साम को आठ बज रहे थे घर के एक कोने में दीपक टीम टिमा रहा था जनवरी महीने की सर्द हवाएं कभी कभी घर के दरवाजे से टकरा कर अन्दर प्रवेश करती तो ठंड  से पूरा शरीर सिहर जाता मै मा से बोला "मा घर में अब ज्यादा खर्चा बढ़ गया है  इसलिए अब हमें कुछ काम करना चाहिए क्यों  की पिता जी का भी उम्र अब ढलता जा रहा है"


       "हा बेटा बात तो तुम सही कह रहे हो पर जाओगे कहा बाहर में कोई अपना भी तो नहीं है " मा ने एक लम्बी सास खींचते हुवे बोली, इतने में घर में रखे दीपक को बिल्ली ने गिरा दिया और चारो तरफ धूप अंधेरा छा गया ।
      मै मा से बोला "आज पापा बहुत लेट किए है अभी तक काम से वापस नहीं आए "मै घर में लगी छोटी सी अलार्म घड़ी के आवाज को सुन कर बोला मा जिस अंगीठी में आग ताप रही थी अब वो भी बुझने कि कगार पर थी गाव में सन्नाटा छा रहा था बीच बीच में कुतो की भौंकने की आवाजे आ रही थी।


"बेटा राजन तुम जाओ अब सो जाओ मै देखती हूं तुम्हारे बाउजी कब तक आते है "

"ठीक है मा" मै कह कर बिस्तर पर सोने चला गया हमारे घर में इतनी रीगरीबी थी कि बिछाने एवम् ओढ़ने का भी पूरा इंतजाम नहीं था ठंड इतनी ज्यादा थी और चादर बहुत छोटी थी जिससे पाव ढको तो सर और सर ढको तो पाव गन गनाने लगता था ऐसी गरीबी के बारे में सोच सोच कर कभी कभी रतो के नींद भी उड़ जाती थी यह सब देख मै अगली सुबह ही सहर जाने का मन बना लिया  फिर ना जाने कब करवट बदलते बदलते  नींद लग गई पता ही नहीं चला 


         अगली सुबह साम को मै ममी पापा से इजाजत एवम् आशीर्वाद लेकर सहर जाने के लिए घर से निकल पड़ा मुझे पवन एक्सप्रेस पकड़ना था इसलिए जल्दी से स्टेशन के तरफ बढ़ गया थोड़ी ही देर बाद गाड़ी आ गई और मै ट्रेन पकड़ लिया फिर क्या था गाड़ी अपने रफ्तार में आगे बढ़ रही थी और मेरा मन कभी घर पर तो कभी मुंबई चला जाता था, मन में घर की गरीबी को मिटाने का सपना था तो अनजान सहर में अपना आशियाना कैसे बनाएंगे इसका डर भी सता रहा था।


       अगले दिन साम सात बज्जे तक मेरा 28 घंटे का सफर कट चुका था सुबह चार बजे मेरी ट्रेन मुंबई पहुंचने वाली थी इसकी जानकारी  एक आदमी से पूछने पर मुझे मालूम चला उसी वकत मेरी ट्रेन भुसावल स्टेशन पर रुकी शाम को सात बजरहे थे मैने सोचा क्यों ना कुछ नस्ता कर लिया जाय इसलिए मै ट्रेन में बेच रहे वेंडर से दो समोसे खरीदा और खाने लगा तब तक गाड़ी वहा से खुल चुकी थी मै समोसा खाने के बाद बैग से बोतल निकाल कर पानी पिया और अन्य यात्रियों की तरह बैठें बैठे झपकी लेने लगा ।


       जब मेरी आंख खुली तो मै चौक गया मै उस वक्त ट्रेन में नहीं था बल्कि एक आलीशान महालनुमा
 घर में मुलायम बिस्तर पर अपने आपको पाकर मै हक्का बक्का रह गया और काफी  घबडा गया मेरा शरीर दर्द से फटा जा रहा था  मेरे शरीर का कपड़ा धूल मिट्टी से सना हुआ था मै कुछ भी सोच पता इससे पहले ही मेरी कनो में एक मधुर  आवाज टकराई


        "क्यो परेशान है मिस्टर राजन, मै आपको यहां लेकर आई हूं  "इतना कहते हुए एक खूब सूरत औरत मेरे सामने चाय का ट्रे लिए हुवे प्रस्तुत हुई मै हैरान परेशान बस एक टक उनको निहारे जा रहा था मेरे आंखो से आंसू छलक आए मेरा जुबान अनेकों सवाल करने के लिए व्याकुल हो रहे थे ।


      "इतना सब सोचने कि जरूरत नहीं है आप मुझे अपना ही समझिए और आपके मन में जितना भी सवाल है बाद में पुछियगा अभी आप आराम से चाय पिजिय और वो रहा  बाथ रूम आप जब तक चाय पिएंगे फ्रेश होंगे तब तक मै खाना बना लूंगी "वो मैडम   बाथरूम के तरफ इशारा करते हुवे बोली और किचन में चली गई।


      परन्तु मेरी धड़कने अपनी रफ़्तार से कई गुना तेजी से धड़क रही थी मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था फिर भी मै किसी तरह चाय ख़तम करके  अन बने मन से बॉथरूम में चला गया थोड़ी देर बाद मै फ्रेश हो कर बाहर आ गया और हौल  में रखे सोफे पर बैठ गया तभी अन्दर से आवाज आई "आप अन्दर आ जाओ मै खाना लगा चुकी हूं "यह सुनकर मै अन्दर चला गया अन्दर टेबल पर दो थाली में खाना परोसा गया था फिर मै टेबल पर बैठ कर सोचने लगा कि मेरे साथ ये सब क्या हो रहा है।


                      एहसान तले जिंदगी राजनएवम् जया का प्यार परवान चढ़ने लगा



       "अरे भाई अब क्या सोचने लगे खाना ठंडा हो रहा है सुरु तो कीजिए ज्यादा टेंसन्न लेने की जरूरत नहीं है "

मै कुछ भी समझ पाता उससे पहले ही वो मैडम निर्देश पर निर्देश देती जा रही थी और मेरे पास उनके निर्देशों को मानने के सिवा कोई रास्ता भी नहीं था।

         फिर मै जल्दी जल्दी खाना खाने लगा खाना खाने के बाद मैडम मुझे अपने बेड रूम में लेकर गई और बोली आप परेशान है,  न कि आप कहा  पर है ,और मै कौन हूं तो सुनिए " मेरा नाम जाया है मै कल साम को जब अपनी गारमेंट कंपनी से बाहर निकली जो की कुर्ला स्टेशन के बाहर स्थित है, तो देखा स्टेशन के बाहर कुछ लोगो की भीड़ लगी थी मै भी अपनी गाड़ी रोक कर वहा पहुंची तो काफी लोगो की भीड़ थी जिसमे हमारे कंपनी के वर्कर्स ज्यादा थे सब लोग बोलने लागे ।

"देखिए ना मैडम ये लड़का नासा खुरानी का सीकार है हम लोग कंपनी से बाहर निकले तो देखा ये स्टेशन के बाहर लड़खड़ाते हुवे निकला और यहां आकर गिर गया और इसका बैग भी फटा हुआ है लगता है सबकुछ चोरी हो गया है "एक वर्कर ने कहा


         "ठीक है बैग चेक करो तो उसमे सयाद पता ठिकाना हो "मै एक कारीगर को निर्देश देते हुए बोली फिर आपका बैग चेक किया गया तो उसमे कुछ भी नहीं मिला सिवाय सिर्फ सर्टिफिकेट के लेकिन सर्टिफिकेट मिलने से ये तो पता चल गया कि आप हमारे ही राज्य के रहने वाले है फिर हमने सबको बोला कि इसे हमारी गाड़ी में बैठा दो मै अस्पताल लेकर जा रही हूं


      एक वर्कर्स की मदत से मै आपको  अस्पताल ले गई वाहा पर आपका इलाज कराई रात ग्यारह बजे डाक्टर ने मुझ से बोला "मैडम अब आप इन्हे घर ले जा स्क्ती है  अब कोई खतरा की बात नहीं है  परन्तु इनको होश में आने में अभी आठ से दस घंटे लगेंगे फिर मै आपको अपने साथ घर लेकर आ गई  हमारी नौकरानी भी छुट्टी पर चली गई है इसलिए आपका देख भाल भी कोई नहीं करने वाला था इसलिए आज कंपनी भी नहीं गई " अब बताइए मेरे बारे में आपकी क्या राय है।


        यह सुनकर मेरे आंखो से आशु बहने लगे मै हैरान था कि जिस औरत को मै अभी तक गलत समझ रहा था वो तो  देवी सम्मान है " मैडम जी मै इस एहसान का बदला कैसे चुकाऊंगा आपने तो मुझ अजनबी पर इतना भरोसा करके  अपना गुलाम बना ली है" मै आश्चर्य भरे नजरो से देखते हुवे बोला।

      "हूं आप पागल है क्या किस बात का एहसान"

              मैडम ने मेरे आंसू पोछ दी और अपनी बात जारी रखते हुए बोली आप भी यूपी के तथा में भी यूपी के हा एक बात है की हमारे शास सशुर बहुत दिन पहले आकर यही बस गए थे " हा रह गई एहसान की बात तो वो तो आप से वसूल ही लूंगी,अच्छा ये बताओ आप काम की तलाश में मुंबई आए है तो समझिए आपको काम मिल गया  कल से मेरा काम  आप को करना है मै भी उनके जाने के बाद काम करते करते थक चुकी हूं "इतना कहते हुए मैडम जी भाऊक हो गई ।

"क्या हुआ मेम आप उदास क्यो होगई" मै आश्चर्य भरे नजरो से देखते हुवे बोला

        " क्या बताऊं राजन जी हमारी भी जिंदगी में कभी खुशियां ही खुशियां थी परन्तु ना जाने हमारी खुशियों को किस कि नजर लग गई  कि शादी के दो साल भी नहीं गुजरे थे कि एक एक्सिडेंट में वो भी मुझ को छोड़ कर चले गए उसके बाद मै घर में अकेली पड़ गई  तो ममी पापा बोले कि तुम घर में अकेली कैसे रहोगी  तो मै अपनी छोटी बहन को अपने पास रख ली फिर दिन गुजरने लगा  कुछ ही दिन बाद ममी पापा भी चल बसे उन लोगो के जाने के बाद मै बिल्कुल अकेली पड़ गई  अब कोइ भला बुरा भी कहने वाला नहीं था मै दिन भर कंपनी के काम में मासगुल रहने लगी परंतु मेरी बहन अब अकेली हो गई थी उसकी खामोशी को देख कर   एक दिन मै   सोची की ,अपनी सहूलियत के चलते मै अपनी बहन का जीवन बर्बाद कर रही हूं  अब मेरे सिवा उसका है कौन और वैसे भी पूजा बी ए सी कर ही चुकी है  यह सोच कर घर में एक नौकरानी रख लीं और बहन को विदेश भेज दी ताकि अच्छी पढ़ाई लिखाई कर सके और हमारे इतना बड़ा बिजनेस को संभालने में हमारी सहायता कर सके।


         परन्तु जब मै कल आपको देखी तो मुझे ऐसा लगा आप भले इंसान है आपका सर्टिफिकेट देख कर    मै समझ गई कि आप अच्छी खासी पढ़ाई लिखाई भी किए है आप हमारी सायद मदत कर सकेंगे"

       "क्यों करेंगे ना हमारी मदत्त "

        "ये भी कोई पूछने की बात है मेम अब तो ये जिंदगी भी आपकी दी हुई अमानत है शायद आप नहीं होती तो इस अनजान सहर में मेरा क्या होता पता नहीं शायद मर ही गया होता"

         "हूं मरे आपका दुश्मन ऐसा क्यो बोल रहे "इतना कहते हुवे मेम साहब मेरे मुंह पर अपना हाथ रख कर चुप करा दी
           "अच्छा ठीक है अभी बहुत रात हो चुकी है चलिए आराम करते है "

            "ठीक है आप आराम कीजिए मै हॉल में जा कर सो जाता हूं " इतना कहते हुवे मै बिस्तर से उठने को तैयार हुआ तो अचानक मेम साहब मेरा हाथ पकड़ कर बोली

             "नहीं आप हॉल में नहीं सोएंगे बल्कि आज से आप यही मेरे साथ इसी कमरे में सोएंगे "

            "मै कुछ समझा नहीं मेम साहब "

            "इसमें समझने की क्या बात है जनाब  मै जैसा बोलती हूं वैसा कीजिए "

            "ठीक है मेम मै सोफे पर सो जाता हूं आप बेड पर सो जाइए "
   
           "उहु सोफे पर  बेड पर क्यों नहीं, आप मुझसे डरते है और मै तो कब से आपको अपना मान चुकी हूं"

             "मै क्या बोल सकता हूं, आपकी जैसी मर्जी"
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             "तो दूर क्यो खड़े है पास आइए ना मै कब से तड़प रही हूं आप को पाने के लिए"  इतना कहते हुए मैडम जी मुझे अपने बाहों में भर ली  फिर क्या था हम दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर रेंगने लगे और कमरे में हम दोनों की सिसकारियों की आवाज गूंजने लगी और धीरे धीरे हम दनो एक दूसरे में समाने लगे  जया ने मुझे पूरी रात सोने नहीं दिया जब हम दोनों तृप्त हुवे तो जया बोली बताइए इस "इस एहसान का बदला मै कैसे चुकाऊंगी "

             "छोड़िए ना मेरी तो एहसान तले जिंदगी ही दबी है  मेरा एहसान तो बहुत छोटा है"

         अगली सुबह हम लोग जल्दी उठ गए और  तैयार होकर कंपनी के लिए निकल गए जया ने रास्ते से ही मिठाई खरीद ली ताकि वर्करों में बंटी जायगी जब हम लोग कंपनी पहुंचे तो हमे देख कर वर्करों में एक खुशी कि लहर दौड़ गई क्यों की सुबह में ही कंपनी में फोन करके जया ने बोल दी थी कि आपलॉगो का नए सीईओ से आज मिलाऊंगी इसलिए सभी वर्कर गेट पर ही फूल माला लेकर हामलोगो का इंतजार कर रहे थे।

       उसके बाद जया ने मुझे सारा दिन काम के बारे में वर्करों के बारे में समझती रही और पता ही नहीं चला कब शाम हो गई सारे वर्करों के जाने के बाद हमलोग भी आफिस बंद करके घर लौटने लगे तो रास्ते में जया ने बोली " आज रात हम लोग जी भरके प्यार करेंगे इसलिए मै आज खाना नहीं बनाऊंगी "

        " तो हम लोग खाएंगे क्या "

         "आज हम लोग होटल में खाएंगे चलिए" फिर जया ने गाड़ी होटल के तरफ घुमा दी होटल में खाना खाने के बाद जया ने दो बोतल बियर मंगा दी चुकी मै सराब नहीं पीता था इसलिए मै मना कर दिया     "आप नहीं लेंगे तो मै भी नहीं लूंगी "जया ने जिद करते हुवे बोली।

        "ठीक है बाबा नाराज मत होइए, दीजिए "मैंने जया के हाथ से बियर का कैन लेते हुवे बोला
        फिर हम दोनों बियर पी कर रात 10 बजे तक घर वापस आ गए जब हमदोनो फ्रेश हो कर वापस बैड रूम में पहुंचे तो उस वक़्त जया के  बदन पर भूरे रंग की नाईटी अत्यंत सोभा बढ़ा रही थी कमरे की दूधिया रोशनी में जया का बदन शीशे की तरह चमक रहा था फिर क्या था हमदोनों एक दूसरे से लिपट गए और हम दोनों की सिसकारियों की गुज कमरे के दीवारों से टकराने लगी हम दोनों के बीच की सारी दूरियां खत्म हो चुकी थी।

         फिर एक दिन जब मै कंपनी से लौटा तो जया बोली "कल हमारी बहन आ रही है इसलिए मै सुबह उसे लेने कुर्ला एयरपोर्ट जाऊंगी और हा जब तक वो यहां रहेगी हम दोनों इतना खुलम खुला नहीं मिलेंगे और समय आने पर हम दोनों अपने रिलेशन शिप के बारे में बतादेंगे  हमें यकीन है पूजा हमारे शादी के लिए मान जायगी

        "ये तो बहुत अच्छी बात है मेम परन्तु अपनी शाली को लाने मै खुद जाऊंगा "मै मजाक करते हुवे बोला
    "नहीं आप नहीं पहचानेगे मै खुद जाऊंगी, आप कल थके रहेंगे"

     "मतलब क्या है मै थका रहूंगा वो कैसे "


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     "मतलब ऐसे की आज रात भर आपको काम करना पड़ेगा कल दिन भर कंपनी में काम करना पड़ेगा तो थकेंगे नहीं जनाब"जया ने मुझे छेड़ते हुए बोली।

      अगले दिन मै सुबह कंपनी में चला गया और जया एयरपोर्ट निकल गई मेरे कंपनी पहुंचने के करीब एक घंटे बाद मोबाइल कि घंटी बजने लगी मै समझ गया कि जया का फोन होगा परन्तु ऐसा नहीं था ये पूजा का फोन था पूजा ने बताया। की जया का एक्सिडेंट हो गया है यह सुन कर मेरे पैरो तले जमीन ही खिसक गई मै तुरन्त भागते हुवे हॉस्पिटल पहुंचा तो देखा जया जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी यह देख मेरे आंखो के सामने अंधेरा छाने लगा कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करू अपनी जया को कैसे बचाऊ ।


       एक तरफ पूजा का रो रो कर बुरा हॉल हो गया था  मै डाक्टर को बोला "सर जितना पैसा लगाना हो लगाइए परन्तु मेरी जया को बचा लीजिए" परन्तु डाक्टर ने " ऐम सॉरी "कह कर चला गया।

      मेरी चहकती हुई जया खामोश थी मुंह पर ओक्सीजन मस्क लगा था एक नर्स ने हमे बाहर बैठने के लिए बोली ,डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयास कर रही इधर पूजा के आंखो से आशु बह रहे थे।

          हमारा कलेजा जोर जोर से धड़क रहा था कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मै अपनी जया को कैसे बचाए तभी एक डाक्टर बाहर आया और बोला "आप लोग अंदर जा कर जया से मिल लीजिए सायद अब हम उन्हें नहीं बचा पाएंगे "यह बात सुनकर  पूजा चिला चिला कर रोने लगी मै पूजा को किसी तरह समझा कर हम दोनों लड़खड़ाते क़दमों से आप्रेशन थिएटर में गए तो देखा जया के आंखो से आशु बह रहे थे और वो हम दोनों को बस एक टक निहारे जा रही थी

       तभी जया ने हमे इसारा करके अपने पास बुलाई और बोली "राजन जी लगता है मै अब नहीं जी पाऊंगी मेरी सांसे थम रही है इसलिए पूजा को आप के हवाले छोड़े जा रही हूं मैंने आप से किया हुआ वादा निभा कर जा रही हूं कि आप को जिंदगी में कभी दुखी नहीं होने दूंगी आप का भी मेरे एहसान का बदला चुकाने का वक्त आ गया है मुझसे वादा कीजिए की मेरी फूल सी बहन को कभी दुखी नहीं होने देंगे औ"जया पूजा का हाथ मेरे हाथ में सौंप कर बोली"अरे पगली निराश क्यों होती है मै तुम्हारा हाथ एक सच्चे इंसान के हाथ में देकर जा रही हूं, और जा भी कहा रही हूं बहुत जल्द तुम्हारी बेटी के रूप में दोबारा वापस आऊंगी  यह कहते हुए जया  अपनी आंखे हमेशा हमेशा के लिए बंद कर ली  और हम दोनों अवाक सा देखते रह गए।